रुड़की के वर्तमान नेता कर रहे स्वार्थ की राजनीती:तुषार अरोड़ा

नगर निगम चुनावो को लेकर पिछले महीने की 22 अक्टूबर से गहमागहमी जारी है। नेता जी स्वयं को अपनी-अपनी पार्टी से टिकट का मजबूत दावेदार बता रहे थे।किंतु जब पार्टी आलाकमान ने टिकट की घोषणा की तो यही नेता बगावत पर उतर आये।कोई नेता हाथी पर सवार हो गया तो किसी नेता के समर्थक नेता जी को निर्दलीय लड़ने को दबाव बनाने लगे।इसी बीच हाथी पर चढ़े हुए नेता 2 घण्टो के भीतर ही हाथी से नीचे उतर गए।वही दूसरी और एक पार्टी के सभी टिकट के दावेदार अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी को चुनाव के लिये अयोग्य घोषित करने में लग गए।इसी बीच प्रत्याशी के अयोग्य होने की सूचना मिलते ही एक पूर्व पालिका चेयरमैन के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी और सुना जा रहा है कि उन्होंने तुरंत नामांकन पत्र भी मंगवा लिया।
इसी सब घटनाक्रम पर रुड़की के बुद्धिजीवी लोग भी अपनी पैनी नजर बनाए रखे हैं।वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रदेश पदाधिकारी और वर्तमान में भाजपा के आधे-अधूरे युवा नेेता तुषार अरोड़ा ने उक्त घटनाक्रम पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि

“जो नेता कल तक टिकट न मिलने पर हर हाल में निर्दलीय या किसी अन्य दल से चुनाव लड़ने की बात कर रहे थे।उन्हें रातों-रात डैमेज कंट्रोल में मना लिया जाएगा।भारी-भरकम मालदार विभागों का अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष भी बना दिया जाएगा।लेकिन प्रश्न केवल यह है कि इन नेताओं द्वारा बागी होकर नामांकन करने का ढोंग क्या सिर्फ मालदार विभाग पाने को लेकर किया जा रहा था? क्या रुड़की की जनता को बेवकूफ नही बना रहे थे यह नेता?क्या इन नेताओं को केवल निजी स्वार्थों की पूर्ति हेतु चुनाव लड़ना था या यह नेता सच में जनसेवा करना चाहते थे? इन सब प्रश्नों के बीच लगातार हो रहे ड्रामो को देखते हुए अब तो यही लगता है कि हमे किस प्रत्याशी को support करना है यह भी हमे अपने स्वार्थ के आधार पर ही देखना चाहिए।भाड़ में जाए जनता,इन नेताओं का कुछ नही बनता।”

इस बात से साबित हो जाता है कि नेता केवल स्वयं के स्वार्थ की राजनीती कर रहे हैं।जनसेवा से इन नेताओं को कोई सरोकार नही है।वहीँ चुनाव में किस प्रत्याशी को सपोर्ट करना है इस बात पर अरोड़ा का कहना है कि वह उस व्यक्ति को ही सपोर्ट करेंगे जो रुड़की की जनता के हित की बात करेगा और अपने वादों पर टिका रहेगा।गौरतलब है कि तुषार अरोड़ा एक जाने-माने आरटीआई एक्टिविस्ट है।साथ ही तुषार की शहर में अपनी एक ईमानदार छवि है।अब देखना यह है कि कौन प्रत्याशी पेशे से अध्यापक्क इस बुद्धिजीवी को साध पाता है।वैसे गौरव गोयल के प्रति इनका झुकाव किसी से छुपा भी नही है।शहर के नालो की सफाई व्यवस्था के निरीक्षण में गौरव गोयल के साथ इनकी काफी जमी थी।

anupamsaini

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