देहरादून:लानत है ऐसी सरकार पर,छात्रों को भी नही बक्शा, पुलिस ने अनशनरत छात्रों पर बरसाए लात-घूसे।

ब्यूरो रिपोर्ट
रुड़की/समाचार
पिछले 17 दिनों से धरनारत्त आयुर्वेदिक कॉलेज के छात्रों का अनशन देहरादून के परेड ग्राउंड में लगातार जारी है लेकिन उनकी सुध लेने के लिए प्रशासन और शासन तथा जनप्रतिनिधियों ने कोई जरूरी नहीं समझा और ना ही उनकी समस्या को जानने की कोशिश के लिए धरना स्थल पर छात्रों के बीच पहुंचे। जो एक सत्तासीन सरकार पर बड़ा कलंक है, की छात्र, जो देश का भविष्य कहा जाता है, इसे धरना प्रदर्शन के लिए विवश होना पड़े ओर ऐसा करने पर सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन अंधेरे का फायदा उठाकर आंदोलनरत छात्रों को डंडे के बल पर उठाने का प्रयास करता है। पुलिस द्वारा छात्रों पर बेरहमी से की गई लाठी चार्ज की घटना बेहद शर्मनाक है। बावजूद इसके छात्रों का अनशन परेड ग्राउंड में जारी है।
छात्रों का कहना है कि पहले आयुर्वेद विश्वविद्यालय और फिर परेड ग्राउंड में उन्होंने धरना देकर सरकार से इस मामले के निस्तारण की अपेक्षा जताई थी लेकिन सरकार की पुलिस ने उन पर ही जानलेवा हमला करते हुए छात्रों को गंभीर चोटें पहुंचाई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में आयुष कॉलेजों के लिए सरकार द्वारा नया शुल्क ढांचा निर्धारित किया गया था, इसके तहत छात्रों से शुल्क वसूल भी लिया था लेकिन हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई में शुल्क लौटाने और पुराना शुल्क लागू करने का आदेश जारी किया था। इसे लेकर 1 साल से अधिक का समय बीत गया लेकिन निजी आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्र हर बड़े अधिकारी और नेता का दरवाजा खटखटाने गए लेकिन उनके हाथ सिर्फ मायूसी ही लगी। कॉलेजों में बढ़ा हुआ शुल्क जमा न कराने पर छात्रों को बैक परीक्षा के फार्म नहीं भरने दिए जा रहे, तो दूसरी और कक्षाओं में भी बैठने से साफ इनकार किया जा रहा है। नतीजतन छात्रों ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय में आंदोलन शुरू किया, कई दिनों तक वहां दिन रात का आंदोलन करने के बाद मायूस छात्र समस्या के हल की उम्मीद लिए परेड ग्राउंड पहुंच गए, जहां यूकेडी, कांग्रेस, एनएसयूआई द्वारा उन्हें समर्थन दिया गया। छात्रों ने अपने धरने को 7 दिन पहले आमरण अनशन में बदल दिया था। छात्रों और उनके अभिभावकों ने बताया कि वह पिछले 17 दिनों से यहां धरना दे रहे है, ना तो सरकार और ना ही शासन का कोई नुमाइंदा उनके बीच पहुंचा। पढ़ाई लिखाई छोड़कर छात्र आंदोलन को मजबूर है लेकिन अब सरकार उन्हें अपनी मांगों को मद्देनजर नजर रखते हुए आंदोलन भी नहीं करने दे रही है। इस तानाशाही सरकार के खिलाफ छात्रों ने जो आवाज उठाई है वह मांग पूरी होने तक जारी रहेगी।

जब छात्रों का नही हुआ एक्सरे-

पुलिस के अन्याय और लाठीचार्ज से गंभीर घायल हुए छात्रों को जब निजी अस्पताल में घंटों उपचार नहीं मिला और एक्सरे ना होने पर छात्रों के परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परामर्श के दौरान डॉक्टरों ने छात्रों को बताया कि उनकी छाती पर गहरी चोट भी आई हैं और कुछ छात्रों का गला भी दबाया गया, इसलिए उन्हें एक्सरे कराना चाहिए, लेकिन एक्स-रे कक्ष बंद होने के कारण छात्रों का एक्सरे नही हो पाया, इसके बाद हंगामा बढ़ता देख अधिकारियों ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से वार्ता की और डेढ़ घंटे बाद टेक्नीशियन को बुलाकर छात्रों का एक्सरे कराया। तत्पश्चात अन्य चिकित्सको ने भी अस्पताल पहुंचकर छात्रों का उपचार शुरू किया।
छात्र नेता शुभम चौधरी को पुलिस ने रोका
छात्रों के साथ हुई मारपीट की सूचना पाकर छात्र नेता शुभम चौधरी अपने कार्यकर्ताओं के साथ देहरादून के लिए रवाना हो गए, जैसे ही वह देहरादून में एंट्री कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें साथियों सहित हिरासत में ले लिया। छात्र नेता ने सरकार, मंत्री और पुलिस प्रशासन को कार्यवाई पर कड़ा एतराज जताया। साथ जी कहा कि मंत्री महोदय बातचीत के दौरान कहते है कि कॉलेज उनकी नही मानते, अब यह उनकी मिलीभगत कहे या, कॉलेजों के डर। कि मंत्री वह है और राज कॉलेज संचालकों के चल रहा है।

anupamsaini

Read Previous

रुड़की:विजिलेंस की टीम ने की विद्युत चोरी करने वालों पर कार्यवाही, पांच के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा।

Read Next

रुड़की:जनसभा में सीएम को छात्रों ने दिखाए काले झंडे, पेट्रोल डालने की कोशिश, कई को पुलिस ने हिरासत में लिया।