“अधूरा ज्ञान, फंसाये जान” की कहावत को इस बार विजयादशमी पर्व पर श्रीरामलीला समिति (रजि.) बी.टी.गंज रुड़की पदाधिकारियों के कारनामों ने चरितार्थ कर दिखाया।

ब्यूरो न्यूज़
रुड़की समाचार:हम ऐसा इसलिए कह रहे है कि इस बार बीटी गंज की रामलीला अपने शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक बनाने के लिए भव्य रामलीला मंचन को लेकर बेहद उत्साहित थी और नगर की जनता में भी अच्छा खासा उत्साह देखने को मिल रहा था।


लेकिन अपने शताब्दी वर्ष की रामलीला को ऐतिहासिक बनाने के लिए वास्तव में कमेटी ने इतनी मेहनत की कि उनके सभी दावे उल्टे-पुल्टे हो गए और ऐसे-ऐसे कारनामे हुए की वाकई लोग 100वे वर्ष की रामलीला को याद रखेंगे।
ज्ञात रहे की बीटी गंज रामलीला समिति द्वारा आयोजित की जाने वाली श्रीराम की लीलाओं का भव्य मंचन दिल्ली की मशहूर नाट्य समिति लवकुश द्वारा किया गया था। इसी लवकुश नाट्य समिति पर रावण, कुम्भकर्ण व मेघनाथ के पुतलों को भव्य रुप से बनाने का भी जिम्मा था,जो करीब 125 फुट के बनाये जाने थे, लेकिन किन्ही कारणों के चलते बीटी गंज समिति व लवकुश समिति के बीच तालमेल नही बैठ पाया और लवकुश समिति के कलाकार पुतलों को आधा-अधूरा छोड़ दिल्ली लौट गए। इसके बाद रामलीला समिति बीटी गंज के पदाधिकारियों को पसीना आने लगा और अधूरे कार्यक्रम की औपचारिकता को पूरा करने की जुगत में लग गए। जैसे ही रावण के करीब 70 फुट के पुतले को कर्मचारियों ने खड़ा करना शुरू कर दिया, तभी पुतला असन्तुलित होकर नीचे गिर गया और एक कर्मी उसकी चपेट में आ गया, इस हादसे में उसे कई गभीर चोटें भी आई, जिसे निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया। उसके बाद उल्टे-सीधे पुतले खड़ा करना समिति के लिए टेढ़ी खीर साबित होने लगा और उन्होंने अपने आप ही कर्मचारियों के साथ मिलकर पुतलों को खड़ा करना शुरू कर दिया। इस दौरान कमेटी के लोगो ने पुतलों के जूतों को भी पैरों से तोड़कर पुतलों के ही अंदर डाल दिया। शहर की जनता इस बार के पुतलों को देखने के लिए बेहद उत्साहित थी लेकिन उनके अरमानो पर उस समय पानी फिर गया, जब उन्होंने 125 फिट की जगह मात्र 70 फिट के ही बेतरतीब तरीके से खड़े पुतले देखें, जो देखने में बेहद ही खराब लग रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रामलीला समिति बीटी गंज ने इस बार क्या इस तरह अपने शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक बनाने का ब्यान दिया, जिसमें न तो पुतले वाटरप्रूफ है और न ही वह 125 फुट के। यहां तक कि इन पुतलों में कोई भव्यता भी नही देखनी को मिली। इस बार बीटी की रामलीला के श्रीराम-रावण के युद्ध को देखने के लिए भी बेहद कम लोग नजर आये। नेहरू स्टेडियम में पुतला दहन कार्यक्रम भी पूरी तरह बेकार ही रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रावण, कुम्भकर्ण व मेघनाथ के पुतले भी आधे-अधूरे ही जले, जिन्हें बाद में समिति के लोगों ने रस्सियों से नीचे गिराकर उन्हें जलाया। कुल मिलाकर 100वें वर्ष की रामलीला बीटी गंज समिति पदाधिकारियों के ऊपर भारी पड़ती नजर आयी और लोगों ने समिति की इस लापरवाही पर उन्हें खूब खरी खोटी भी सुनाई ओर जमकर आलोचना भी की।


जब इस मामले को लेकर समिति संरक्षक व पदाधिकारियों से वार्ता की गई तो किसी ने 80 फुट तो किसी ने 75 फुट के पुतलों की ऊंचाई बताई ओर 125 फुट के ब्यान पर बगले झांकने लगे। इस बार की विजयदशमी पर्व पर इस तरह की लापरवाही को लेकर कमेटी के लोगों की काफी थू-थू भी हो रही है।

anupamsaini

Read Previous

बुराई के नाश का संदेश देता है दशहरे का त्यौहार:तुषार अरोड़ा

Read Next

झबरेड़ा:विधानसभा क्षेत्र के पाल बस्ती में विधायक कर्णवाल ने किया 132.62 लाख की सड़क का उदघाटन।