बुराई के नाश का संदेश देता है दशहरे का त्यौहार:तुषार अरोड़ा

दशहरा पर्व पुरे देश में पूरे हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है।दशहरा पर्व मनाने के उद्देश्य को हमें अपने आने वाली पीढ़ी को भी समझाना चाहिए।दशहरा पर भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करके धर्म की स्थापना की थी और माता सीता को रावण की कैद से आजाद कराया था।हमे यह सदैव याद रखना चाहिए कि प्रभु श्रीराम ने मानव शक्तियों की सीमाओं में रहते हुए ही रावण की बुराई का अंत किया था।यदि प्रभु श्रीराम चाहते तो अपने नारायण रूप की शक्तियों का प्रयोग करके भी रावण का अंत कर सकते थे।किंतु प्रभु श्रीराम ने सदा ही मर्यादा पुरुषोत्तम का धर्म निभाया और मानव शक्तियों का प्रयोग करते हुए ही बुराई पर अच्छाई को विजयी दिलवाई।

ऐसी भी मान्यता है कि दशहरा पर माँ दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का अंत किया। इसीलिए दशहरा पर्व से पूर्व 9 दिवसों तक नवदुर्गा शक्ति की पूजा की जाती है तथा दसवें दिन को दशहरा के रूप में मनाया जाता है।वही प्रमुख आईटीआई एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता तुषार अरोड़ा ने पोर्टल से बातचीत में कहा कि दशहरा पर्व पर हमें अपने भीतर की बुराइयों का नाश करने का प्रयास करना चाहिए।हमे आने वाली पीढ़ियों को भी दशहरे के उद्देश्य से अवगत कराना चाहिए। रावण महाज्ञानी व्यक्ति था।प्रभु श्रीराम ने रावण की बुराइयों का अंत किया किन्तु रावण जैसे महाज्ञानी की पूजा आज भी क्यों होती है और रावण का पुतला दहन क्यों किया जाता है।यह भी हमे अपनी आने वाली पीढ़ी को बताना होगा।दशहरा हमारे भीतर की बुराई के नाश करने का संदेश देता है।अतः बुराई से नफरत करें किन्तु बुरे लोगो से नही।

anupamsaini

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